हर पल तुममें
अपने को तलाशती रही
कविता के शब्दों में
अपने को तलाशती रही के
शायद कभी अतीत के
वो छोटे छोटे लम्हे
तुम्हारे अन्दर
मेरे होने का एहसास दिलाये
पर नहीं
मैं नहीं थी , कहीं नहीं थी
नहीं थी तुमसे दूर दूर तक कहीं भी .....
शायद थी मैं तुम्हारे यादों में
तुम्हारे खुसबू में
तुम्हारे ख्वाब और ख्यालों में
पर तुमसे इतनी दूर
के शायद अतीत से लेकर आज में एक लंबा अन्तर आ गया
पर तुम्हे तलाश न सकी .....
हाँ इस तलाश ने अब मुझे
अपने मंजिल तक पहुँचा दिया है ...
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